Monday, September 13, 2010



सोनू के लिये


15 अक्टूबर 1974----12 अगस्त २०१०---


सोनू ,मेरी जेठानी जी का मँझला बेटा ,जो एक माह पहले सबको छोड कर, अन्तहीन पीडा देकर हमेशा के लिये चला गया ।

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सुबह ने अभी-अभी ही तो ,

तेरे नाम लिखी थी ---

आसमां भर धूप...।

जागती आँखों में सजाए थे ,

पंखुडियों से ख्बाब. ।

फिर क्यों चुन लिया तूने,

धूप में नहाया ...

अपना शहर छोड कर ।

एक अनजान गुफा का

अन्तहीन अँधेरा ।


भूल गया ---अपने बूढे पिता की ,

धुँधलाई आँखों की बेवशी ।

तूने एक बार ,सोचा भी नहीं ,

कि,उनके थके--झुके कन्धे ,

कैसे ढोएंगे उम्मीदों का मलबा ।

कैसे पढेंगे , अनन्त- पेजों वाला

तेरे बिछोह का अखबार ,

उनका चश्मा तो खोगया ,

तेरी यादों के ढेर में ही ...।

वक्त गुजरेगा कैसे ...

ताकते सिर्फ , सूना आसमान ...।


काश तू आकर देख लेता कि,

माटी की पुरानी दीवार सी ,

भरभरा कर गिर पडी है तेरी माँ ।

बैठी रहती थी थाली परसे ,

देर रात ...तेरे आने तक ।

तूने देखा नहीं कि ,

तुझे रोकने के लिये ,

दूर तक ....तुझसे ,

लिपटा चला गया है

उसकी आँतों का जाल ।

पेट से निकल कर

कलेजा थामे पडी है वह

लहूलुहान ।


पीडा के गहरे सागर में ,

हाथ पाँव मारती तेरी संगिनी ,

हैरान है ......।

भला इतनी जल्दी

कोई कैसे भूल सकता है ,

प्रथम-मिलन के समय किये गए,

तमाम वादों को

चाँद को छूने के इरादों को

तूने तो कहा था कि ,

तैरना आता है तुझे अच्छी तरह ।

भला, .... जिन्दगी से ,

कोई रूठता है इस तरह ...।

और नाराज होता है इस तरह...

कोई अपनों से ,

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3 comments:

  1. गिरिजा जी… जिसने दिया उसने ले लिया … पीड़ा का कोई पारावर नहीं..जिसपर बीतती है वही जानता है.. ईश्वर समस्त परिवार को सम्बल प्रदान करे और आत्मा को शांति!!

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  2. smrution ko axro me dhal kh kisi chitra ki tarah kavita me sahej liya apne. yahi shabd chitra uske prati aapka pyar bhi hai aur shraddhanjali bhi.hum aapke sath hai.

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  3. शुक्रिया , सलिल जी , कुन्दा जी ।

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