Sunday, February 5, 2012

अपरिहार्य

सुना है कि तुम हो सर्वव्यापक

फिर भी तुम्हारे होने का विश्वास ,

बहुत जरूरी है ।

मेरे होने के लिये ।

चाहे सुदूर पथ में ,

पथरीले बीहडों से

अकेले ही गुजरना हो या

दंगा-पीडित शहर के चौराहों पर

जलती आग में ,

बेनाम ही झुलसना हो ..

बहुत जरूरी है ,

तुम्हारे सम्बल का अहसास,

अपंग हुई सी उम्मीदों को

ढोने के लिये ।

यूँ तो क्षितिज पर

सूरज की लाली है ।

फूलों में खुशबू है ।

वन में हरियाली है

पर बहुत जरूरी है ,

तुम्हारी निकटता का उल्लास

इन सबमें खोने के लिये...

सूनी टहनी पर ,

गौरैया उदास है ।

पीले पत्तों सी ,

अब झरने लगी,

हर आस है ।

प्रतीक्षित है एक मधुमास,

नव- पल्लव संजोने के लिये ।

16 comments:

  1. आस की आस,
    जगत, विपरीत प्रयास,
    प्रतीक्षित मधुमास

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  2. पर बहुत जरूरी है ,
    तुम्हारी निकटता का उल्लास
    इन सबमें खोने के लिये...।

    सचमुच उसकी निकटता का अहसास ही हमें सारे सुखों-दुखों के बीच भी स्थिर रखता है...

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  3. कल 07/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. गिरिजा जी,
    उसके होने का एहसास ही नहीं हमें.. ज़र्रे-ज़र्रे में उसी का नूर है.. और हमारे लिए उसके होने की अनुभूति भी नहीं है.. सागर कि मछली की तरह.. जब तक रेत पर गिराकर तडपती नहीं उसे पता ही नहीं होता कि वो सागर में है..
    बहुत ही गहरे भाव और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाती उतनी की भाव-प्रवण अभिव्यक्ति!!

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  5. बहुत जरूरी है ।
    मेरे होने के लिये ।
    चाहे सुदूर पथ में ,
    पथरीले बीहडों से
    अकेले ही गुजरना हो या
    दंगा-पीडित शहर के चौराहों पर
    जलती आग में ,
    बेनाम ही झुलसना हो ..
    बहुत जरूरी है ,
    तुम्हारे सम्बल का अहसास,

    दिल की बात कह दी आपने

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  6. पर बहुत जरूरी है ,
    तुम्हारी निकटता का उल्लास
    इन सबमें खोने के लिये...।

    वाह! बहुत सुन्दर!

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  7. इस एहसास की आस ही ऊर्जा-संचालन करती है...सुन्दर अभिव्यक्ति

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  8. विश्वास और आस पर ही तो टिका है ये जीवन...
    पतझड़ को बसंत की आस जो होती है..

    बहुत सुन्दर.
    सादर.

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  9. प्रतीक्षित है एक मधुमास...
    बहुत अच्छा लगा आपके ब्लौग पर आकर.
    आपने जो सुझाव दिए थे (...मेरे हर क्षण के सार रहे!) उनके लिए आभारी हूँ!, यूँही स्नेह बनाये रखियेगा! धन्यवाद!

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  10. तुम्हारे होने का विश्वास ,

    बहुत जरूरी है ।

    मेरे होने के लिये ।

    यही अपरिहार्य है..........उत्कृष्ट सृजन...........

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  11. पर बहुत जरूरी है ,
    तुम्हारी निकटता का उल्लास
    इन सबमें खोने के लिये...।

    waah.. bahut sundar panktiyaan.. :)

    palchhin-aditya.blogspot.in

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  12. भाव पूर्ण अभिव्यक्ति...

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  13. प्रतीक्षित है एक मधुमास,
    नव- पल्लव संजोने के लिये ।

    भावनात्मकता का सुंदर प्रवाह है इस खूबसूरत कविता में. बधाई.

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  14. सुंदर अभिव्यक्ति ,भावपूर्ण बहुत अच्छी रचना

    MY NEW POST...मेरे छोटे से आँगन में...

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  15. अंधकार के बाद प्रकाश को आना ही पड़ता है।
    अच्छी कविता।

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  16. सुना है तुम हो सर्व व्यापक,
    फिर भी तुम्हारे होने का विश्वास बहुत जरूरी है
    मेरे होने के लिये....
    बेहतनीय एवं सराहनीय रचना.....
    नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2)

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