Saturday, September 27, 2014

विपक्ष-धर्म

झूठा हो या सच्चा मुद्दा, 
हम तो सिर्फ विरोध करेंगे ।
जिम्मेदारी अब उनकी  है,
हम तो सिर्फ विरोेध करेंगे ।

वामपक्ष हम  
उल्टा चलना धर्म हमारा ।
चिनगारी को ज्वाल बनाना
कर्म हमारा ।
समतल राह न होने देंगे । 
राहों में गतिरोध बनेंगे।

हंगामा , हड़ताल, 
और आरोपों की बौछारें 
चक्का-जाम ,रैलियाँ ,
पुतला--दहन और फटकारें ।
सत्तासीनों को लुढ़काओ
जनता से अनुरोध करेंगे ।

कैसे भूल सकेंगे ,जब थी 
हाथ हमारे सत्ता।
अपनी ही थी हर बाजी  
हर चाल तुरुप का पत्ता ।
फिर से कैसे वह सब पाएं, 
जैसे भी हो शोध करेंगे ।

जनता को जतलाएंगे 
उससे चुनाव में भूल हुई है।
सर्दी गर्मी प्याज टमाटर 
भडकाने को तूल कई हैं।
जनता ने धोखा खाया है 
जनता में यह बोध भरेंगे ।

देश भाड़ में जाए चाहे 
कोई लूटे खाए।
चर्चाओं में छाए रहना , 
केवल हमको भाए। 
सक्रिय रहें सत्ता पाने तक 
खुद को यों संबोध करेंगे ।


9 comments:

  1. हैं ही विपक्षी - अपना कर्तव्य पूरा करेंगे नहीं तो जायेंगे कहाँ ? असलियत जानते हैं ,मान नहीं पाते बेचारे, हाँ , मौका लगते ही इधर पलटी मार सकते हैं!

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति

    ReplyDelete
  3. जबरदस्त ... बहुत ही तीखी धार है व्यंग की ...
    मज़ा आ गया ... अपने देश में तो कम से कम विपक्ष का ऐसा ही हाल है ...

    ReplyDelete
  4. वामपंथ को बातों नहीं अब लातों की जरूरत है। नेहरू का बोया यह बीज रक्‍तबीज बन गया है। बहुत अच्‍छा लताड़ा है इनको।

    ReplyDelete
  5. वामदलों के बारे में एक मुहावरा बड़ा प्रचलित हुआ था कि वे LEFT में इसलिये हैं क्योंकि वे RIGHT नहीं हैं... और मैं बचपन से एक मुहावरा अपने दोस्तों में सुनाया करता था कि इन विपक्ष वालों के किसी नेता के विषय में यदि सतादल वाला यह कह दे कि उनके पिता का नाम अमुक है तो विपक्ष के वह नेता भड़क कर कहेंगे कि किसने कहा कि वो मेरे पिता हैं! इसमें सता दल की कोई साज़िश है!
    आपने तो इस विद्रूप चेहरे को बहुत सुन्दर शब्दों में सजा दिया है, दीदी!

    ReplyDelete
  6. आपकी ये रचना चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.in/ पर चर्चा हेतू 11 अक्टूबर को प्रस्तुत की जाएगी। आप भी आइए।
    स्वयं शून्य

    ReplyDelete

  7. कैसे भूल सकेंगे ,जब थी
    हाथ हमारे सत्ता।
    अपनी ही थी हर बाजी
    हर चाल तुरुप का पत्ता ।
    फिर से कैसे वह सब पाएं,
    जैसे भी हो शोध करेंगे ।

    सशक्त व्यंग्य विपक्ष के स्वरूप पर। हम विपक्ष हैं हमारा काम विरोध करना है जैसे भी हो तुम्हारा और देश का काम तमाम करना है।

    ReplyDelete