सोमवार, 11 मई 2026

गीत

 अर्थहीन हैं गीत

लिखे ये किसको तूने री?

भावों के तो साथ जुड़े हैं ,

दुख भी दूने री ।

 

किसको फुरसत कौन सुनेगा !

सुन भी ले पर कौन गुनेगा !

उनकी जेबों में मेवे हैं,

चना चबैना कौन चुनेगा !

दरवाजे पर दस्तक क्या ,

घर तो हैं सूने री ।

 

सम्बल पाने जब जब जिनका ।

दामन थामा जब जब जिनका।

नीड़ बनाने जैसे भी ,दिन रात

जुटाया तिनका तिनका ।

उनके पास बहुत हैं ऐसे

और नमूने री ।

 

दिल को दिल से राह !

अरे सब झूठी बातें हैं ।

चिन्तन में केवल छल बल

और मन में घातें हैं ।

नेह वचन विश्वास कि जैसे

माट-मटूने री ।

 

गीत नहीं संगीत नहीं ,

अन्तर से सच्चे मीत नहीं ।

उनको क्यों दें आमंत्रण ,

जिनको गर्मी या शीत नहीं ।

जुड़े असंगत तार ,

नहीं होते हैं छूने री ।