Yeh Mera Jahaan

मंगलवार, 15 जून 2010

मान्या का लिखना तो देखो

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--> मान्या का लिखना तो देखो मान्या का लिखना तो देखो काम उसे कितना तो देखो पेन किसी का हाथ लगा है य...
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शनिवार, 5 जून 2010

मेरे आँगन नीम

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बरसों से आँगन में मौजूद यह नीम का पेड़ कई मुश्किलों का घर होने के बावजूद हमारे साथ है । मुश्किलें--जैसे कि हर समय कचरा होते रहना । पक्षियों...
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गुरुवार, 3 जून 2010

पहली--बारिश -कुछ क्षणिकाएं

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(1) बारिश की बूँदें, पत्तों पर पडीं ऐसे- प्रसाद की रेबडी, हथेली पर अम्मा रख देती हैं जैसे । (2) बारिश की पहली फुहार। कई दिनों के फाकों के बा...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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