Yeh Mera Jahaan

बुधवार, 16 जून 2010

संवेदना की भाषा और निरक्षरता की पीडा

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संवेदना की भाषा और निरक्षरता की पीडा --------- बैंगलोर 16 जून । -------------------------------------- वाणी अम्मा अब काम प...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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