Yeh Mera Jahaan

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

चिता या चीता

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आज ही अखबार में पढा कि परीक्षा परिणाम को अच्छा बना कर अपनी साख को बचाने के लिये विभाग के आला अफसरों ने एक नया किन्तु विचित्र सुझाव दिया है...
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सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

वह बात

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कहदो वही बात मुझसे तुम आज कहदी जो सुबह - सुबह सूरज ने नेह भर मैदानों , गलियों से लहरों से , कलियों से बिखराये कितने रंग खु...
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रविवार, 5 फ़रवरी 2012

अपरिहार्य

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सुना है कि तुम हो सर्वव्यापक फिर भी तुम्हारे होने का विश्वास , बहुत जरूरी है । मेरे होने के लिये । चाहे सुदूर पथ में , पथरीले बीह...
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मंगलवार, 31 जनवरी 2012

एक पूरी मौत

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30 जनवरी की एक कविता -------------------- बापू को किसने मारा इसका उत्तर उतना ही जाना पहचाना है जितना कि हमारे देश को मिली आजा़दी...
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गुरुवार, 26 जनवरी 2012

गज़ल या गीत ?

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साखी में गज़ल पर हुई लम्बी बहस को पढने के बाद मैं इतना तो समझ गई हूँ कि गज़ल लिखना आसान काम नही है इसलिये इन रचनाओं को गज़ल कहने साहस नही...
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शनिवार, 21 जनवरी 2012

'आर्ट ऑफ लिविंग'--एक यात्रा प्रसंग .

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बैंगलोर आते-जाते रहने के कारण कर्नाटक ऐक्सप्रेस से एक रिश्ता सा बन गया है . हर बार यात्रा में कोई न कोई यादगार अनुभव होता ही है . इस बार भ...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2012

दो बाईयन की वार्ता

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" नए साल की राम - राम । " " राम - राम ' भैन ' , इधर कहाँ जाती है काम करने ?" " गान्धीनगर में । " ...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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