Yeh Mera Jahaan

शनिवार, 10 मार्च 2012

तेरे दो अक्षर

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जब दर्द कोई गहराया अन्तर मेरा घबराया था कौन निकट जो आया मुझको आश्वस्त बनाया जब जाना मैंने पाया वे तेरे दो अक्षर थे मैं थी तुमसे अनजानी तम क...
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सोमवार, 5 मार्च 2012

दुःखान्त

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(1) "दुखान्त यह नही होता कि रात की कटोरी को कोई जिन्दगी के शहद से न भर सके और वास्तविकता के होंठ कभी उस स्वाद को चख न सकें । दुःखान्त य...
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शनिवार, 3 मार्च 2012

सृजन की पीडा का फल

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सुबह से ही उसकी हालत मुझे बेचैन कर रही थी । बार बार उसका उठना फिर पसर जाना ,मुँह से झाग गिरना ..सब कुछ व्यथित कर देने वाला । यशपाल जी की एक ...
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बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

चिता या चीता

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आज ही अखबार में पढा कि परीक्षा परिणाम को अच्छा बना कर अपनी साख को बचाने के लिये विभाग के आला अफसरों ने एक नया किन्तु विचित्र सुझाव दिया है...
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सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

वह बात

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कहदो वही बात मुझसे तुम आज कहदी जो सुबह - सुबह सूरज ने नेह भर मैदानों , गलियों से लहरों से , कलियों से बिखराये कितने रंग खु...
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रविवार, 5 फ़रवरी 2012

अपरिहार्य

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सुना है कि तुम हो सर्वव्यापक फिर भी तुम्हारे होने का विश्वास , बहुत जरूरी है । मेरे होने के लिये । चाहे सुदूर पथ में , पथरीले बीह...
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मंगलवार, 31 जनवरी 2012

एक पूरी मौत

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30 जनवरी की एक कविता -------------------- बापू को किसने मारा इसका उत्तर उतना ही जाना पहचाना है जितना कि हमारे देश को मिली आजा़दी...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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