Yeh Mera Jahaan

बुधवार, 14 नवंबर 2012

एक वज़ह खुशियों की

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खुशियों की एक खास वज़ह सी  जैसे पहली किरण सुबह की । अभी-अभी तो  आयीं थीं ये , अरे होगई पूरे छह की
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सोमवार, 12 नवंबर 2012

उजाला भरदें

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कोना-कोना जगमग करदें । खुशियों को खुद अपना घर दें । जो भी दिखे अकिंचन तम सा , उसकी जेब उजाला भरदें  । ब्लाग जगत के सभी परिजनों को  ...
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शनिवार, 3 नवंबर 2012

करवा-चौथ स्पेशल

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-------------------------------- यह क्या ! मेंहदी न महावर . न नए बेंदी-बिछुआ ! कुन्ती सुहागिन है और कल ही करवा-चौथ व्रत था । मुझे पता है क...
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रविवार, 28 अक्टूबर 2012

सबरस

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( यह पोस्ट पढने से पहले--- 25 अक्टूबर को सलिल जी ( चला बिहारी ब्लागर बनने  ) ने अपने ब्लाग पर ध्रुवगाथा को लेकर एक विस्तृत समीक्षा लिखी ...
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मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

एक कविता अपनों के लिये

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---------------------- बुझने को है अब हर शिकायत   तेल खत्म होते दीपक जैसी शिकायत कि , अब क्यों नही मिलते हो तुम उस तरह,  जिस तरह तय ...
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गुरुवार, 4 अक्टूबर 2012

लोकार्पण---एक रपट

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----------------------------------- 1 अक्टूबर 2012 को 'ध्रुवगाथा' और 'अपनी खिडकी से' का लोकार्पण होना था सो होगया । इसकी ...
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सोमवार, 24 सितंबर 2012

'अपनी खिडकी से'--एक समीक्षक की नजर से

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बड़ों के लिए किस्से बचपन के - लोकेन्द्र सिंह गिरिजा कुलश्रेष्ठ का पहला कहानी संकलन है 'अपनी खिड़की से'। भले ही यह उनका पहल...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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