Yeh Mera Jahaan

मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

माँ मेरी सुनो !!!

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माँ तुम मेरी सुनो  मत सुनो अब उनकी जो कहते हैं कि , बेटी को आने दो खिल कर मुस्काने दो । बेटे-बेटी का भेद मिटा कर समानता की सरिता लहरा...
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सोमवार, 17 दिसंबर 2012

अनजान शहर से गुजरते हुए-----100 वीं पोस्ट

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किसी अजनबी शहर से गुजरते हुए मुझे अक्सर अहसास होता है कि बहुत जरूरी  होती है, सजगता, समझ , और जानकारी उस शहर के--इतिहास--भ...
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बुधवार, 5 दिसंबर 2012

सफर का एक और खूबसूरत पडाव

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बैंगलुरु--5 दिसम्बर ---------------------------------------- सगाई--21 नवम्ब र 24 नवम्बर 2012 को  मयंक और श्वेता पवित्र परिणय-सूत्र ...
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बुधवार, 14 नवंबर 2012

एक वज़ह खुशियों की

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खुशियों की एक खास वज़ह सी  जैसे पहली किरण सुबह की । अभी-अभी तो  आयीं थीं ये , अरे होगई पूरे छह की
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सोमवार, 12 नवंबर 2012

उजाला भरदें

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कोना-कोना जगमग करदें । खुशियों को खुद अपना घर दें । जो भी दिखे अकिंचन तम सा , उसकी जेब उजाला भरदें  । ब्लाग जगत के सभी परिजनों को  ...
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शनिवार, 3 नवंबर 2012

करवा-चौथ स्पेशल

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-------------------------------- यह क्या ! मेंहदी न महावर . न नए बेंदी-बिछुआ ! कुन्ती सुहागिन है और कल ही करवा-चौथ व्रत था । मुझे पता है क...
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रविवार, 28 अक्टूबर 2012

सबरस

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( यह पोस्ट पढने से पहले--- 25 अक्टूबर को सलिल जी ( चला बिहारी ब्लागर बनने  ) ने अपने ब्लाग पर ध्रुवगाथा को लेकर एक विस्तृत समीक्षा लिखी ...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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