Yeh Mera Jahaan

शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

राष्ट्रगीत के सम्मान में

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अंगरेजी राज में राष्ट्रगान के रूप में  ' गॅाड सेव द क्वीन ' गीत गाना अनिवार्य था . तब श्री बंकिमचन्द्र चटर्जी ने , जो उस समय सरकारी...
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शनिवार, 19 जनवरी 2013

एक सवाल

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  नन्नू बहुत ही प्यारा लगभग दो साल का मासूम है । वह नौकरानी रमली के साथ रहता है । उसी के साथ सोता है और उसी के हाथों खाता-पीता है । उसे पता...
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रविवार, 6 जनवरी 2013

धूप

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एक कविता मान्या के लिये ------------------------ निकल घोंसले से सूरज के , चुगने आई दाने- दुनके। फुदक रही टहनी-टहनी , गौरैया जैसी धूप ।...
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शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

29 दिसम्बर 2012 की कविता

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माँ, सुनो--2 -------------- .....और अन्ततः मैं जिन्दगी से हार गई जीत कर बोलो माँ , मैं करती भी क्या   क्षत-विक्षत मेरा तन...मन रोम-...
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मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

माँ मेरी सुनो !!!

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माँ तुम मेरी सुनो  मत सुनो अब उनकी जो कहते हैं कि , बेटी को आने दो खिल कर मुस्काने दो । बेटे-बेटी का भेद मिटा कर समानता की सरिता लहरा...
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सोमवार, 17 दिसंबर 2012

अनजान शहर से गुजरते हुए-----100 वीं पोस्ट

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किसी अजनबी शहर से गुजरते हुए मुझे अक्सर अहसास होता है कि बहुत जरूरी  होती है, सजगता, समझ , और जानकारी उस शहर के--इतिहास--भ...
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बुधवार, 5 दिसंबर 2012

सफर का एक और खूबसूरत पडाव

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बैंगलुरु--5 दिसम्बर ---------------------------------------- सगाई--21 नवम्ब र 24 नवम्बर 2012 को  मयंक और श्वेता पवित्र परिणय-सूत्र ...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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