Yeh Mera Jahaan

रविवार, 17 फ़रवरी 2013

एक आसमान

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16 जनवरी को मुझे एक सन्देश मिला ---"एक आसमान । अन्तिम पंक्ति न लिखती तो हमारा भी एक आसमान होता ।" किसी अनजान नम्बर से मिला यह सन्...
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बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

सर्वव्यापक

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श्वास में ,प्रश्वास में तुम हो  आस में विश्वास में तुम हो  अश्रु में या हास में तुम हो  दो दृगों की प्यास में तुम हो । उत्साह का स्फु...
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मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

चौंतीस साल पुरानी कविता का मर्म

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जयपुर वाली बुआजी के चले जाने का समाचार क्या मिला है मन में अजीब सी बेचैनी भर गई है । वे मेरी छोटी बुआ सास की देवरानी थीं लेकिन हमें ,खास तौ...
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शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

सपने पतझर-पात होगए

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ठूँठे से दिन-रात होगए । झूठे से जज़बात होगए । अरमां पंख--विहीन पडे हैं  सपने पतझर पात होगए । जब सब था स्वीकार तुम्हें, हर मुश्किल आ...
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शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

राष्ट्रगीत के सम्मान में

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अंगरेजी राज में राष्ट्रगान के रूप में  ' गॅाड सेव द क्वीन ' गीत गाना अनिवार्य था . तब श्री बंकिमचन्द्र चटर्जी ने , जो उस समय सरकारी...
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शनिवार, 19 जनवरी 2013

एक सवाल

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  नन्नू बहुत ही प्यारा लगभग दो साल का मासूम है । वह नौकरानी रमली के साथ रहता है । उसी के साथ सोता है और उसी के हाथों खाता-पीता है । उसे पता...
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रविवार, 6 जनवरी 2013

धूप

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एक कविता मान्या के लिये ------------------------ निकल घोंसले से सूरज के , चुगने आई दाने- दुनके। फुदक रही टहनी-टहनी , गौरैया जैसी धूप ।...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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