Yeh Mera Jahaan

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

मुझे धूप चाहिये

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यह मेरी एक बाल कहानी का शीर्षक है और पुस्तक का भी । यह पुस्तक अभी-अभी एकलव्य ( भोपाल ) से प्रकाशित हुई है । इसमें आठ कहानियाँ संकलित हैं । ...
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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

इसलिये कि....

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मैंने अगर की है कोई भूल , तो इसलिये नहीं कि भूल जाओ मुझे तुम अपनी किसी भूल की तरह ही । और बनालो रास्ता दूर जाने का मुझसे, अपने आपसे ...
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रविवार, 14 अप्रैल 2013

एक नाम ---एक दरिया

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आज गनगौर(गणगौर) पूजा है। अब केवल अपने परिवेश की बात करूँ तो दूसरे त्यौहारों की तरह गणगौर--पूजा भी अब काफी संक्षिप्त ,औपचारिक और अकेली होगई...
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मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

आधार

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सुनो , जब मैं कहती हूँ या कि मुझे लगता है कि , तुम खूबसूरत हो । तब यकीनन इसका आधार , नही होता महज  तुम्हारा खूबसूरत होना। बल्कि होत...
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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

अधिकारी विधाताय भवः

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पहले हमारा विचार था कि 'अतिथि देवो भवः' की तर्ज पर 'अधिकारी देवो भवः' लिख कर सबको ,खास तौर पर अपने अधिकारी को चकित ,हर्षित...
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सोमवार, 1 अप्रैल 2013

होली और वह अद्भुत नाट्य-मंचन

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हमारे गाँव की होली पूरे इलाके में सबसे अलग होती थी । मेरे ननिहाल और दूसरे गाँवों में जहाँ लोग होली में रंग-गुलाल कम और धूल ,कीचड, गोबर, मल...
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शनिवार, 30 मार्च 2013

आँकडों का बाजार

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अफसर ने कहा अपने मातहत को दुत्कार कर कहा -- "काम है यह वाहियात वापस ले जाओ सारे कागजात रिपोर्ट में आँकडे तो हैं ही नही ।  हमें त...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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