Yeh Mera Jahaan

बुधवार, 29 मई 2013

गर्मी और मन---कुछ व्यंजनाएं

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(1) चिलचिलाती धूप  तमतमाया रूप  मौसम का दौडते हैं वाहन छाती पर लगातार,, धुँआधार खुद को बचाए रखने  बार-बार... बेमन यूँ बन गया है  क...
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सोमवार, 20 मई 2013

पथरीली राहों पर

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19 मई 2013 ---------------- काकाजी (पिताजी) को गए तीन साल होगए । इन तीन सालों में मुझे अनुभव हुआ है कि वे जाने के बाद भी गए नही है ,वे ...
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शनिवार, 11 मई 2013

साँझ ढले

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उम्र के चमकते दिन में माँ प्यारी ,पूजनीया ,अतुलनीया और न जाने क्या- क्या होती है लेकिन सूरज के ढलते ही माँ बोझ बन जाती है । उसके काँपते हाथ...
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बुधवार, 8 मई 2013

मन पंछी सा क्यों नही है ?

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मन जहाँ भी रमता है  पौधे की तरह जमता है कहीं भी किसी भी ज़मीं मिले जरा सी भी धूप और नमी   फैल जातीं हैं जडें गहरे तक बिना पूछे ,बिना ...
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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

मुझे धूप चाहिये

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यह मेरी एक बाल कहानी का शीर्षक है और पुस्तक का भी । यह पुस्तक अभी-अभी एकलव्य ( भोपाल ) से प्रकाशित हुई है । इसमें आठ कहानियाँ संकलित हैं । ...
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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

इसलिये कि....

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मैंने अगर की है कोई भूल , तो इसलिये नहीं कि भूल जाओ मुझे तुम अपनी किसी भूल की तरह ही । और बनालो रास्ता दूर जाने का मुझसे, अपने आपसे ...
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रविवार, 14 अप्रैल 2013

एक नाम ---एक दरिया

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आज गनगौर(गणगौर) पूजा है। अब केवल अपने परिवेश की बात करूँ तो दूसरे त्यौहारों की तरह गणगौर--पूजा भी अब काफी संक्षिप्त ,औपचारिक और अकेली होगई...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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