Yeh Mera Jahaan

रविवार, 30 मार्च 2014

ऐसा नव-नवसंवत्सर हो ।

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नव-संवत्सर आप सबके लिये मंगलमय हो । जाग गया मौसम जैसे  सर्दी की फेंक रजाई । टहनी-टहनी पल्ल्व पीके, महकी उठीअमराई । जैसे जागे जल्दी भो...
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बुधवार, 19 मार्च 2014

गुजरी तारीख

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कब तक बाट निहारते भटकेगा अविराम ! रे मनवा अब लौट चल, घिर आयी है शाम । क्यों लहरों को कोसता ,यह तूफानी मौन ! नाम लिखा कर रेत पर अमिट हुआ...
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गुरुवार, 13 मार्च 2014

एक के दो , दो के चार ।

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एक संस्मरण  -------------------- मेरे मिष्ठान्न--प्रेम को मेरे सभी परिजन जानते हैं । ताऊजी के परिवार में किशोर भैया को और हमारे बीच मुझे ...
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शुक्रवार, 7 मार्च 2014

एक कविता की असाधारण समीक्षा

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महिला --दिवस के बहाने एक बार फिर .... ------------------------------------------------------------------------------- हमारे संस्कृत के अध...
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शनिवार, 1 मार्च 2014

धवल धार का काला सच

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" कल से दूध 50 रुपए लीटर मिलेगा ।"---दूध वाले ने कल ही सुना दिया ताकि आम आदमी तय कर सके कि चाय को चुल्लूभर दूध दिखाने की भी उसकी...
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शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

मुझे तुम्हारी जरूरत है ।

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कैसी व्यस्तता है कि ,  अब फुरसत नही मिलती  यह देखने की कि  बुलबुल कैसे चुगा रही है दाना अपने बच्चों को । कि नीम की टहनियों में फूटते प...
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गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

किस्सा लड़की से परी बन जाने का ।

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यह जादुई किस्सा उस समय का है जब मैं शायद सातवीं कक्षा में थी और किशोर भैया (मेरे मौसेरे भाई ) आठवीं या नौवीं में । भैया बचपन से ही बड़े ...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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