Yeh Mera Jahaan

सोमवार, 19 मई 2014

कै हंसा मोती चुगै...

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19 मई 2014 (पाँचवीं पुण्य तिथि) पिछली  स्मृतियाँ  जारी.... अपने सिद्धांतों के प्रति काकाजी में जो खंड था उसका प्रभाव अच्छा हो रहा था ऐसा...
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रविवार, 11 मई 2014

रहत अचम्भा जानिये ।

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सोचा था कि काकाजी के लिये कुछ लिखूँ ।आधा-अधूरा कुछ लिखा भी लेकिन पोस्ट यह संस्मरण हुआ , क्यों हुआ ? --------------------------------------...
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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

आश्वस्ति

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मैं विश्वास करना चाहती हूँ  कि तुम्हारी मुस्कान के पीछे  नही है कोई दुरभि-सन्धि । कि तुम बातोंबात  बैठे साथ-साथ निर्वासित कर मुझे रातो...
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शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

'कुछ ठहरले और मेरी जिन्दगी '

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बावज़ूद इसके कि हम जैसी चाहते हैं ज़िन्दगी अक्सर वैसी नही होती उसे बलात् ही खूबसूरत मानने , बनाए रखने या फिर वैसी कल्पना करने से पीछे नही ह...
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शनिवार, 5 अप्रैल 2014

यों मिलना जिन्दगी से

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वक्त को काटना--  उस तरह नही जिस तरह  किसान काटता है पकी फसल  या दर्जी काटता है कपडा  बल्कि ,जिस तरह काटता है चूहा  कागज या लक...
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रविवार, 30 मार्च 2014

ऐसा नव-नवसंवत्सर हो ।

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नव-संवत्सर आप सबके लिये मंगलमय हो । जाग गया मौसम जैसे  सर्दी की फेंक रजाई । टहनी-टहनी पल्ल्व पीके, महकी उठीअमराई । जैसे जागे जल्दी भो...
12 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 19 मार्च 2014

गुजरी तारीख

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कब तक बाट निहारते भटकेगा अविराम ! रे मनवा अब लौट चल, घिर आयी है शाम । क्यों लहरों को कोसता ,यह तूफानी मौन ! नाम लिखा कर रेत पर अमिट हुआ...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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