Yeh Mera Jahaan

मंगलवार, 24 जून 2014

शायद...

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हर ज़ख्म को सहेजा, उम्मीद में कि कुछ भी, आहों से फूट निकले  शायद कि गीत हो । बाज़ार में सडक पर  जो भी मिला  विहँसकर  हमने उसे पुकारा...
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मंगलवार, 17 जून 2014

वनवास हुए हम

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आखिरी पल में जीने की आस हुए हम । धुँधलाए नयनों की प्यास हुए हम । सौतेली माँ सी रही जिन्दगी  इसलिये उम्रभर का वनवास हुए हम । हमें महकन...
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रविवार, 1 जून 2014

कितने पास, कितने दूर !

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" आप कहाँ से हैं ?" परिचय के बिना पास बैठा व्यक्ति भी कितना दूर होता है , पार्क में बैठी उस अधेड़ उम्र की महिला ने उस दिन य...
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सोमवार, 19 मई 2014

कै हंसा मोती चुगै...

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19 मई 2014 (पाँचवीं पुण्य तिथि) पिछली  स्मृतियाँ  जारी.... अपने सिद्धांतों के प्रति काकाजी में जो खंड था उसका प्रभाव अच्छा हो रहा था ऐसा...
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रविवार, 11 मई 2014

रहत अचम्भा जानिये ।

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सोचा था कि काकाजी के लिये कुछ लिखूँ ।आधा-अधूरा कुछ लिखा भी लेकिन पोस्ट यह संस्मरण हुआ , क्यों हुआ ? --------------------------------------...
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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

आश्वस्ति

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मैं विश्वास करना चाहती हूँ  कि तुम्हारी मुस्कान के पीछे  नही है कोई दुरभि-सन्धि । कि तुम बातोंबात  बैठे साथ-साथ निर्वासित कर मुझे रातो...
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शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

'कुछ ठहरले और मेरी जिन्दगी '

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बावज़ूद इसके कि हम जैसी चाहते हैं ज़िन्दगी अक्सर वैसी नही होती उसे बलात् ही खूबसूरत मानने , बनाए रखने या फिर वैसी कल्पना करने से पीछे नही ह...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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