Yeh Mera Jahaan

शनिवार, 12 जुलाई 2014

सूखा --तीन चित्र

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लेकिन वे दिन गए जब सावन का नाम लेते ही  बादल , वर्षा ,बिजली ,हरियाली मोर पपीहा आदि सब आँखों में सजीव होउठते थे । अब सावन तो आगया है । पर गल...
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मंगलवार, 8 जुलाई 2014

देवता प्यासे ही सोगए !

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देवशयनी एकादशी। देवताओं के सोने का दिन । माना जाता है कि अब देवता शयन करेंगे । चार माह बाद 'देवउठनी' एकादशी (दीपावली के ग्यारहवे दिन...
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रविवार, 6 जुलाई 2014

वह घर मुझे आज भी अपनी ओर खींचता है ।

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यह सच है कि जहाँ बचपन व्यतीत होता है वहाँ से एक अटूट लगाव होता है लेकिन उस घर में मेरा बचपन नही बीता । छोटे भाई ने आने में ऐसी जल्दबाजी दिख...
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मंगलवार, 24 जून 2014

शायद...

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हर ज़ख्म को सहेजा, उम्मीद में कि कुछ भी, आहों से फूट निकले  शायद कि गीत हो । बाज़ार में सडक पर  जो भी मिला  विहँसकर  हमने उसे पुकारा...
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मंगलवार, 17 जून 2014

वनवास हुए हम

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आखिरी पल में जीने की आस हुए हम । धुँधलाए नयनों की प्यास हुए हम । सौतेली माँ सी रही जिन्दगी  इसलिये उम्रभर का वनवास हुए हम । हमें महकन...
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रविवार, 1 जून 2014

कितने पास, कितने दूर !

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" आप कहाँ से हैं ?" परिचय के बिना पास बैठा व्यक्ति भी कितना दूर होता है , पार्क में बैठी उस अधेड़ उम्र की महिला ने उस दिन य...
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सोमवार, 19 मई 2014

कै हंसा मोती चुगै...

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19 मई 2014 (पाँचवीं पुण्य तिथि) पिछली  स्मृतियाँ  जारी.... अपने सिद्धांतों के प्रति काकाजी में जो खंड था उसका प्रभाव अच्छा हो रहा था ऐसा...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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