Yeh Mera Jahaan

गुरुवार, 9 जुलाई 2015

कुछ तो बात हुई है

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चौराहे पर भीड़ लगी है , कुछ ना कुछ तो बात हुई है . कैसे ये खिड़कियाँ खुली हैं , कुछ ना कुछ तो बात हुई है . सूखा कहीं तबाही भीष...
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शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

थोड़ी सी जमीन

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माँ को जो खड़ी है जीवन के अंतिम पड़ाव पर , चुग्गा की तलाश में किसी चिड़िया सी ही वह  जीवनभर  उडती रही है यहाँ-वहां , ऐसे-वैसे बस म...
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मंगलवार, 16 जून 2015

मिसेज शर्मा --2

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मिसेज शर्मा और संगीत आजकल जब भी कालबेल बजती है ,आने वाला चाहे कोरियर वाला हो या ऑर्डर पर पानी और घर की दूसरी चीजों वाला पर मुझे मिसे...
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सोमवार, 1 जून 2015

मिलिये मिसेज शर्मा से

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मिसेज शर्मा के पडौस में आने का समाचार मेरे लिए वैसा ही था  जैसा अखबार के कूपन पर इनाम निकलने का होता है . मिसेज शर्मा यानी इलादेवी मुझे ...
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शुक्रवार, 29 मई 2015

'चबूतरे का सच '----कहानी की सार्थकता व सौन्दर्य का एक सच

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  यह शीर्षक डा.श्रीमती आशा पाण्डे के कहानी संग्रह का है जो उन्होंने मुझे भेजा है . संग्रह के विषय में कुछ कहने से पहले यह बताना मेर...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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