Yeh Mera Jahaan

शनिवार, 2 जनवरी 2016

जर्जर गातों जैसे दिन

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मँहगाई सी रातें सीमित खातों जैसे दिन । हुए कुपोषण से , ये जर्जर गातों जैसे दिन । पहले चिट्ठी आती थीं पढते थे हफ्तों तक हुईं ...
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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2015

चाँदनी मुस्कान है .

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धूप नभ का गर्व है अभिमान है चाँदनी स्नेहमय मुस्कान है । दीप्त अविचल गगन का विश्वास है. नयन में सौन्दर्य की यह प्यास है . रात के ...
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मंगलवार, 1 सितंबर 2015

झूला ,भुजरिया,' भेजा', और ' डढ़ैर'

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अपने गाँव की बात  ---------------------- इन चार शब्दों में कम से कम दो नाम अटपटे और आपके लिये अपरिचित होंगे शायद .(स्थानीय नाम जो हैं ...
16 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 19 अगस्त 2015

रामौतार सुनो !

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बेशक , इसमें तुम्हारी गलती नही थी  कि , मोह टूट गया तुम्हारा अपने गाँव से । अपने खेत -- खलिहान ... और नीम की छांव से । कि खींच ल...
14 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 27 जुलाई 2015

यह समस्या मेरी है .

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एक जंगल से गुजरते हुए , लिपटे चले आए हैं , कितने ही मकड़जाल. चुभ गए कुछ तिरछे नुकीले काँटे धँसे हुए मांस-मज्जा तक . टीसते रहते ह...
13 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 21 जुलाई 2015

वह कहानी वाली बात

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वैसे तो कई कहानियाँ ,जबसे मैंने सुनना समझना शुरु किया था ,मेरे ,हमारे साथ लगी हुई हमें निर्देशित करती आ रही हैं ,जिन्हें कुछ को ...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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