Yeh Mera Jahaan

मंगलवार, 27 सितंबर 2016

जोड़ते हम रहे ...

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राह में बिखरे काँटे हटाते रहे . उम्रभर खाइयाँ ही पटाते रहे . जीत लेंगे भरोसा किसी भी तरह , यूँ ही ताउम्र खुद को मिटाते रहे . ...
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शनिवार, 24 सितंबर 2016

दिवा-स्वप्न का समय नही है .

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एक बार फिर उसने गैरत को ललकारा है. सद्भावों पर जैसे यह आघात करारा है . दिवा-स्वप्न कबतक देखोगे ? अब तो आँखें खोलो . कब तक व्यर...
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मंगलवार, 13 सितंबर 2016

ग्यारहवीं कक्षा में हिन्दी का पीरियड .

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यह लघुकथा उच्च कक्षाओं में भी हिन्दी की स्थिति बताने के लिये काफी है .कहीं छात्र पढ़ना नही चाहते और कहीं शिक्षक पढ़ाना नही चाहते या जानते ...
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मंगलवार, 6 सितंबर 2016

विश्वास की विजय

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शिक्षक-दिवस पर विशेष ---------------------------------------  बात सन् 1973 के दिसम्बर माह की है जब मैं पहाड़गढ़ पढ़ने जाती थी . उस समय द...
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बुधवार, 31 अगस्त 2016

अधपकी दाल

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एक ‘ ऑडिटोरियम ’ का शानदार मंच ,सुन्दर सजावट ,लाइट ,कैमरा ..कथित सभ्य शिक्षित वर्ग के दर्शक ..कुल मिलाकर किसी राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम...
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गुरुवार, 18 अगस्त 2016

कैसे भूलूँ और कैसे याद करूँ ..

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अब से पहले हम बहनें या तो माँ के पास अपने गाँव चली जातीं थीं या मैं गाँव को यादों में ही जी लिया करती थी . गाँव, जहाँ सावन का अर्थ ही रक...
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शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

संयोग ऐसे भी होते हैं .

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26 जुलाई को मैं दिल्ली होते हुए बैंगलोर आ रही थी . हवाईयात्रा समय की दृष्टि से एक तरह का चमत्कार ही होती है . चालीस-बयालीस घंटे का सफर म...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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