Yeh Mera Jahaan

रविवार, 30 अक्टूबर 2016

तुम्हारे नाम

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द्वार-देहरी जलता जो , हर दीप तुम्हारे नाम है . अन्तर्मन से निकला जो , हर गीत तुम्हारे नाम है . तुमको लगें दुआएं सारी . पूरी हो...
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गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

आम आदमी

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तंगहाली में , ख़्वाहिशों की कमी हूँ मैं आम आदमी हूँ । मैं भीड का एक हिस्सा हूँ खून से लिखा किस्सा हूँ । फुटपाथ पर चलता हूँ ...
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मंगलवार, 27 सितंबर 2016

जोड़ते हम रहे ...

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राह में बिखरे काँटे हटाते रहे . उम्रभर खाइयाँ ही पटाते रहे . जीत लेंगे भरोसा किसी भी तरह , यूँ ही ताउम्र खुद को मिटाते रहे . ...
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शनिवार, 24 सितंबर 2016

दिवा-स्वप्न का समय नही है .

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एक बार फिर उसने गैरत को ललकारा है. सद्भावों पर जैसे यह आघात करारा है . दिवा-स्वप्न कबतक देखोगे ? अब तो आँखें खोलो . कब तक व्यर...
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मंगलवार, 13 सितंबर 2016

ग्यारहवीं कक्षा में हिन्दी का पीरियड .

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यह लघुकथा उच्च कक्षाओं में भी हिन्दी की स्थिति बताने के लिये काफी है .कहीं छात्र पढ़ना नही चाहते और कहीं शिक्षक पढ़ाना नही चाहते या जानते ...
16 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 6 सितंबर 2016

विश्वास की विजय

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शिक्षक-दिवस पर विशेष ---------------------------------------  बात सन् 1973 के दिसम्बर माह की है जब मैं पहाड़गढ़ पढ़ने जाती थी . उस समय द...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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