Yeh Mera Jahaan

रविवार, 13 नवंबर 2016

'कुछ ठहरले और मेरी जिन्दगी' --सुश्री मंजू वैंकट ( बैंगलोर) की नजर में .

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  यह गीत संग्रह  यों तो जिसकी भी दृष्टि में गया है , सराहा गया है . किन्तु  अपनी दृष्टि को शब्द सबसे पहले   भाई सलिल जी ने दिये . अब  बैंग...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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