Yeh Mera Jahaan
शनिवार, 31 दिसंबर 2016
अफसोस न हो तेरे यूँही चले जाने का .
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(1) मैं इस बार पूरे साल बचाती रही अपने आपको , डूबने से ..अनुभूतियों के समन्दर में . शुरुआत में ही .. उस भयानक सच ...
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सोमवार, 12 दिसंबर 2016
कोहरे में ढँका सबेरा
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लगभग तीस वर्ष पूर्व लिखी (जब मैं गाँव में थी)यह कविता मेरे नए कविता संग्रह 'अजनबी शहर में ' में भी है . यह कविता इन दिनों भी प्रा...
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रविवार, 13 नवंबर 2016
'कुछ ठहरले और मेरी जिन्दगी' --सुश्री मंजू वैंकट ( बैंगलोर) की नजर में .
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यह गीत संग्रह यों तो जिसकी भी दृष्टि में गया है , सराहा गया है . किन्तु अपनी दृष्टि को शब्द सबसे पहले भाई सलिल जी ने दिये . अब बैंग...
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