Yeh Mera Jahaan

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

तुम्हारा आना ---कुछ बिम्ब

›
ख़यालों में तुम्हारा आना फूटना है कोंपलों का ठूँठ शाखों पर पतझड़ के बाद । दस्तक देना है , पोस्टमैन का भरी दुपहरी में थमा...
10 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 26 जनवरी 2017

राजनीति में आवश्यकता है देशभक्त नौजवानों की .

›
दो साल पहले लिखा गया यह आलेख आज भी प्रासंगिक है ----------------------------------------------------------------------- देशभक्त, देश को...
3 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 14 जनवरी 2017

'परब' तिलवा' और मकर-संक्रान्ति--एक संस्मरण

›
' परब ' तिलवा ' और मकर-संक्रान्ति--एक संस्मरण --------------------------------------------- ‘ मकर-क्रान्ति से सूर्य मकर राश...
7 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 11 जनवरी 2017

मेरे अजनबी

›
सफर में अक्सर ऐसे कई मोड़ और चौराहेआते हैं जहाँ हम खुद को अकेला और अनजान पाते हैं .जहाँ न कोई हमारी भाषा समझता है न हम किसी को समझा पाते है...
1 टिप्पणी:
शनिवार, 31 दिसंबर 2016

अफसोस न हो तेरे यूँही चले जाने का .

›
(1)                  मैं इस बार पूरे साल  बचाती रही अपने आपको , डूबने से ..अनुभूतियों के समन्दर में . शुरुआत में ही .. उस भयानक सच ...
3 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 12 दिसंबर 2016

कोहरे में ढँका सबेरा

›
लगभग तीस वर्ष पूर्व लिखी (जब मैं गाँव में थी)यह कविता मेरे नए कविता संग्रह 'अजनबी शहर में ' में भी है . यह कविता इन दिनों भी प्रा...
5 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.