Yeh Mera Jahaan

मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

तुम जो बिछड़े ....

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यह संस्मरण जिया के जाने के बाद लिखा था . काकाजी की पुण्यतिथि पर . कभी पोस्ट नहीं कर पाई . आज सामने आगया तो ब्लाग पर दे रही हूँ . अब उतना प्...
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सोमवार, 3 दिसंबर 2018

पूत के पाँव ...

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“ शाला-भवन तो होना ही चाहिये . ”--- रंमनपुरा के सरपंच ने गणतंत्र-दिवस समारोह में अपने भाषण में कहा .   “ हमारे गाँव के लिये यह बड़ी बा...
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शनिवार, 7 जुलाई 2018

सामने वाला दरवाजा

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सभी सहृदय पाठक एवं ब्लागर साथियों को नमस्कार . मेरा कहानी संग्रह 'क़र्ज़ा-वसूली' प्रकाशित हो चुका है .वैसे  कथा-कहानी  में पहले ह...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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