Yeh Mera Jahaan

शुक्रवार, 13 मार्च 2020

उन्हें सोचो देखो

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क्या कभी सोचा है तुमने कि   गन्दी नाली साफ करते हुए वह कीचड़ में लिथड़ा आदमी क्या सोचता होगा , जब कोई गुजर जाता होगा एकदम साफ दम...
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शनिवार, 31 अगस्त 2019

पहली रचना और उसकी पृष्ठभूमि

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यह कविता 15 अप्रैल सन् 1975 में लिखी गयी थी . बात है जब मैं ग्यारहवी कक्षा में थी .तब 10+2 योजना लागू नहीं थी इसलिए ग्यारहवी की परीक्षा ब...
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सोमवार, 22 जुलाई 2019

हिमालय के कोट में टँका हुआ फूल ---अन्तिम भाग

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 . पिछली पोस्ट-- भाग दो 19 मई की सुबह हमने 'रामदा' से विदा ली और पुनाखा की ओर चल पड़े .रास्ते में फिर से वही खूबसूरत वादियों ...
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शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

हिमालय के कोट में टँका हुआ फूल--भाग 2

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भाग 1 से आगेl थिम्पू ------------ 17 मई 2019  लगभग 2335 मी. की ऊँचाई पर बसा शहर 'थिम्पू' भूटान की राजधानी है और शायद भूटान ...
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गुरुवार, 27 जून 2019

हिमालय के कोट में टँका हुआ फूल

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भाग--1 एक परदेश अपना सा ---------------------------------------------------- जब हिमालय की बात होती है तो कल्पना में या तो देव...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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