Yeh Mera Jahaan

रविवार, 26 जुलाई 2020

कानू

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उस दिन सुबह सुबह चिड़ियों गिलहरियों की चीख पुकार के साथ ही गुलाब की क्यारी में एक नन्हा सा जीव आ गिरा था . वह गिलहरी का बच्चा था ,...
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रविवार, 19 जुलाई 2020

हम कच्ची दीवार हैं

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बन कजरारे मेघ वो, उमडे चारों ओर । रिमझिम बरसीं टूट कर अँखियाँ दोनों छोर । घिरी घटा घनघोर सी यादों के आकाश । बिजली सा कौंधे कहीं अन्तर का सं...
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बुधवार, 1 जुलाई 2020

लिखो पत्र फिर से

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उन दिनों जब तुम्हारे पत्र  हुआ करते थे  मँहगाई के दौर में जैसे सब्जी और राशन या पहली तारीख को मिला हुआ वेतन . पत्र जो हुआ ...
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शनिवार, 27 जून 2020

बचपन के शिलालेख

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(सन्  2001  में लिखा गया एक संस्मरण) समय की लहरों से मानस तट पर लिखे नाम धीरे धीरे मिट ही जाते हैं . फिर मेरा नाम कौनसा कोई संग्रहणीय शिल...
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शुक्रवार, 19 जून 2020

मैं भी तो ....

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घरेलू हिंसा पर आमंत्रित एक लघुकथा  --------------------------------------------------- “ देखो सुमी, वह दूसरे की बच्ची है उसकी जिम्मेद...
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रविवार, 14 जून 2020

छत और आँगन

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आँगन जिसके बिना घर अधूरा लगता है 9 मुझे बचपन से ही घर में आँगन और छत से बड़ा लगाव रहा है .  आँगन तो कवियों की रचनाओं में भी गूँजता ...
14 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 9 जून 2020

कविता रूठ गई है

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( तीन चार साल बाद लिखा एक गीत) चलते चलते चट्टानों पर  चट्टानों सा निर्मम मन कैसे लिख पाता फूलों को, विस्मृत हुआ सुरभि का वन. बिखर...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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