Yeh Mera Jahaan

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

बन्द

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बलबीर बहुत खुश था .आज पलभर में ही टेम्पो ठसाठस भर गया . और दिनों उसे इन्तजार करना पड़ता था . कई बार तो एक दो सवारियों को लेकर ही बाड़े तक चक...
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रविवार, 23 अगस्त 2020

कितने चौराहे

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  हर सुबह करती हूँ एक प्रण फेंककर आवरण आलस्य का ,  करनी ही है पूरी आज कोई कहानी नई या पुरानी .. या कुछ नहीं तो लिख ही डालूँ एक स...
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शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

एक गीत पुरानी डायरी से

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  आज ही पढा--अगर किसी पर भरोसा करो तो पूरी तरह , बिना सन्देह के करो ।क्योंकि तब दो में से एक मिलना तो तय है---या तो जिन्दगी का सबक या एक अच्...
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रविवार, 26 जुलाई 2020

कानू

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उस दिन सुबह सुबह चिड़ियों गिलहरियों की चीख पुकार के साथ ही गुलाब की क्यारी में एक नन्हा सा जीव आ गिरा था . वह गिलहरी का बच्चा था ,...
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रविवार, 19 जुलाई 2020

हम कच्ची दीवार हैं

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बन कजरारे मेघ वो, उमडे चारों ओर । रिमझिम बरसीं टूट कर अँखियाँ दोनों छोर । घिरी घटा घनघोर सी यादों के आकाश । बिजली सा कौंधे कहीं अन्तर का सं...
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बुधवार, 1 जुलाई 2020

लिखो पत्र फिर से

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उन दिनों जब तुम्हारे पत्र  हुआ करते थे  मँहगाई के दौर में जैसे सब्जी और राशन या पहली तारीख को मिला हुआ वेतन . पत्र जो हुआ ...
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शनिवार, 27 जून 2020

बचपन के शिलालेख

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(सन्  2001  में लिखा गया एक संस्मरण) समय की लहरों से मानस तट पर लिखे नाम धीरे धीरे मिट ही जाते हैं . फिर मेरा नाम कौनसा कोई संग्रहणीय शिल...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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