Yeh Mera Jahaan

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2024

उसकी बात

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  खाली पड़े गमले में अनायास ही उग आए थे घासपूस जैसे छोटे छोटे पौधे   अनजाने , अनचाहे . उखाड़ फेंकना था हटानी थी खरपतवार गेंदा ,ड...
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मंगलवार, 23 जनवरी 2024

पहली रचना (पुरानी डायरी से )

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  अभी तक मुझे याद था कि  पहली रचना  मेरा पहला गीत – -- " काँटों को अपनालूँ मैं या मृदु कलियों से प्यार करूँ .. ” है जो किसी तरह न ष्ट ...
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गुरुवार, 4 जनवरी 2024

परदा

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  आवरण या परदा अच्छा नहीं होता पड़ा हो अगर आँखों पर . या किसी भी तथ्य पर .   परदा नही होता अच्छा बेशक जब दीवार बनता है   दृष्टि ...
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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2023

सर्दी के दिन

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अब दिनों का बढ़ना शुरु होरहा है . उससे पहले ही दिसम्बर के छोटे दिनों को लेकर एक कविता पुनः प्रस्तुत है   -----------------------------------...
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शुक्रवार, 1 दिसंबर 2023

हृदय धरा का

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हृदय धरा का  अथाह ,असीम नेह भर उमड़ता है , देखकर प्रिय को पूर्णकला सम्पन्न भर लेता है आगोश में वंचित से किनारों को . भर देता है दामन बादलों ...
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शनिवार, 25 नवंबर 2023

26 /11 की स्मृति में

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26 नवम्बर मेरे लिये विशेष है . आज ही मेरे बड़े पुत्र प्रशान्त का जन्म हुआ . लेकिन आज का दिन मेरे साथ पूरे देश के लिये भी विशेष है क्योंकि सन...
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बुधवार, 22 नवंबर 2023

राग-विराग

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  अमराई को हुआ विराग बिसरा बूढ़ा लगता बाग, भूल रहा सुर तानें मौसम लगे हवा भी भागमभाग .   रिश्तों में जंजीर नहीं है काँटा तो है प...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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