शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

माँ ऐसे स्वर दे


 अँधियारे का त्रास बहुत है ।

उजियारे की आस बहुत है ।

ज्योतिर्मयी शारदे माँ ,

बस रिक्त हृदय भरदे

मन जगमग जग करदे ।

 

दुर्गम पथ सूना सूना है ।

उस पर भय दूना दूना है ।

दृढ़ आशा विश्वास रहे ,

पथ यों गुंजित करदे

अन्तर निर्भय करदे ।                

बस जगमग जग करदे ।

 

जंजालों में मन अटके ना ।

चौराहों पर अब भटके ना ।

गीत नेह के गाती जाऊँ ,

माँ ऐसे स्वर दे ।

मन जगमग जग करदे ।

 

कूल-किनारे हरियाली हो ।

अन्तर कोश नहीं खाली हो ।

नदिया का अविरल प्रवाह ,

निर्मल , कल कल स्वर दे

मन जगमग जग करदे ।

9 टिप्‍पणियां:

  1. कितनी सुंदर भावपूर्ण प्रार्थना है माँ शारदा से आपकी, सचमुच रिक्त ह्रदय को उसका ही उजाला भर सकता है, भीतर अभय का वरदान भी वही जगजननी देती है और मन अविरल प्रवाह सा बहता रहे, ऐसी अटल आस्था भी उसी की कृपा से मिलती है, अनंत शुभकामनाएँ आपको वसंत पंचमी की प्रिय गिरिजा जी !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. नमस्कार अनीता जी बहुत आभार आपके शब्दों की संजीवनी ऊर्जा देती है । आपको भी अनन्त मंगलकामनाएं ।

      हटाएं
  2. जंजालों में मन अटके ना ।

    चौराहों पर अब भटके ना ।

    गीत नेह के गाती जाऊँ ,

    माँ ऐसे स्वर दे ।

    मन जगमग जग करदे ।
    हर मन की प्रार्थना...
    वाह!!!
    माँ शारदे के आशीर्वाद का परिणाम है ऐसी लेखनी
    नमन🙏🙏

    जवाब देंहटाएं