Yeh Mera Jahaan

सोमवार, 21 मार्च 2011

कैसी होली , कैसा फाग

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आप सबको होली की बहुत--बहुत बधाई । इस बार हमारे शहर में तो होली बडी फीकी-फीकी सी रही । न रंग--गुलाल से सजे बाजार, न उमंग भरे छींटे न ही मस...
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सोमवार, 7 मार्च 2011

महिला--दिवस पर दो कविताएं

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(1) तुमने तो कहा था ... --------------- सस्मित स्वीकारोक्ति भरे तुम्हारे दो शब्दों को ही नाव बना कर मैंने तो पार कर लिया विशाल सागर भी । लम्...
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मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

बन्धन

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वसन्ती ने आँगन में पडी खाट पर पसरे रामधन को देखा तो लगा जैसे किसी ने छाती में दहकता कोयला दाग दिया हो । नस-नस में खून जैसे धुँआ बन कर उड चला...
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गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

दो कविताएं प्रेम की

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यादें --------- (1) कुछ यादें, सुपरफास्ट ट्रेन की तरह गुजरती रहतीं हैं अक्सर ह्रदय के पुल से। धडधडाती हुई, चप्पा--चप्पा थर्राती हुई उडाती ह...
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बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

जड

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वर्मा जी ,साहब ने कहा है कि आप दसवीं कक्षा में चले जाएं । पीरियड खाली है । क्यों , यह पीरियड तो गिरीश का है । और वह आज विद्यालय में मौजूद भी...
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शनिवार, 8 जनवरी 2011

अनजाने से सच

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हुए, हादसे भी अपने   उनको अफसाने हैं ।  जीवन के कुछ राज रहे   अब तक अनजाने हैं ।  झूठ बोलकर भी वो सच्चे,  हम झूठे सच कह कर ।  सदा हाशिये पर ...
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गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

३१ दिसम्बर का उपहार

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31 दिसम्बर 2010 -------------------------- सन् 1985 जाते--जाते मयंक (सबसे छोटा बेटा) के रूप में एक उपहार हमें देगया था । मुझे याद आता है...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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