Yeh Mera Jahaan

शनिवार, 28 जुलाई 2012

सावन के गीतों में जीवन के रंग----3

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दूसरे लोकगीतों की तरह सावन के गीतों में भी लोक जीवन के गहरे और पक्के रंग मिलते हैं जिनमें हास-परिहास है । रिश्तों में उलाहने हैं ,टीस है ...
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मंगलवार, 24 जुलाई 2012

सावन के लोकगीतों में आख्यान--2

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पिछली पोस्ट में आपने तीन दुखान्त आख्यानक गीतों के विषय में पढा । आज कुछ और गीत हैं जो पूर्ण आख्यान तो नहीं कहे जासकते पर संवाद उन्हें कथा ...
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रविवार, 22 जुलाई 2012

सावन के लोकगीतों में प्रेमाख्यान---1

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आख्यानक गीत अर्थात् कथाबद्ध गीत । यह प्रबन्ध काव्य का ही एक स्वरूप है । हिन्दी साहित्य में झाँसी की रानी , सरोजस्मृति ,राम की शक्ति-पूजा आ...
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शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

बारिश --- कुछ क्षणिकाएं

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(1) आग..आग..आग.. हर कोई चिल्लाया घबराया दहलाया मौसम विभाग उठा है लो जाग भेज दीं हैं दमकलें छोड रहीं बौछारें रिमझिम फुहारें । (2)...
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सोमवार, 9 जुलाई 2012

एक शाम का लेखा-जोखा

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आज का दिन भी चला गया उम्मीदों की सारी धूप समेट कर बिखर गई थी जो रोज की तरह सुबह-सुबह सूरज के साथ ही हर पल अनछुआ सा ही गुजर गया  करीब...
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गुरुवार, 7 जून 2012

अपनी खिडकी से

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"अपनी खिडकी से" --यह वह संग्रह है जिसमें मेरी सत्रह बाल-कहानियाँ संकलित हैं ।जो बेशक अपनी खिडकी से नही बल्कि उनके ही आँगन में जा...
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रविवार, 27 मई 2012

जेठ हुआ मेहमान

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---------------------- सूरज की दादागिरी,सहमे नदिया ताल। ,हफ्ता, दे देकर हुई हरियाली कंगाल। तीखे तेवर धूप के हवा दिखाए ताव। मौसम के आत...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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