Yeh Mera Jahaan

रविवार, 26 अप्रैल 2015

एक बात -रोशनी से ..

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रोशनी ! तुम अभी मत आओ मेरे अँधेरे कमरे में. किसी नए-नए पड़ोसी की तरह .  अस्त-व्यस्त है सबकुछ  तुम आओगी , मुझे  दिखाओगी  कमरे का...
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मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

शब्दों से ..

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कैसी अजीब बात है कि शब्द खामोश हैं तो ख़ामोशी बोल रही है . अखरता है यूं ख़ामोशी का बोलना । शब्दों ने क्यों थककर तलाश लिया है कोई अ...
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मंगलवार, 31 मार्च 2015

कुछ तो कहो

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सन्नाटा बढ़ जाए ,  इससे पहले बात करो   . सन्देहों को तोड़ो  . मतभेदों की रात करो . तुम मेरी सुनो मैं तुम्हारी सुनूँ अवरोधों पर घ...
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सोमवार, 9 मार्च 2015

जैसा भी है...

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महिला-दिवस पर एक लघुकथा --------------------------------------- " बात कुछ समझ में नही आती यार कि सिर पर डलिया का बोझ उठाए , तो औरत ...
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मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015

झलकियाँ

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परसों गाँव जाना हुआ .चौदह घंटे और लगभग तीन सौ किमी की थकान भरी यात्रा में कुछ ऐसी बातें सामने आईं जो सामान्य नहीं कही जा सकतीं .बल्कि काफी...
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शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

गीत

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नेह या अपनत्व की , जब बात आई  है , हाय अपनी चेतना हमने सुलाई है . अन्यथा टुकड़ों बिखर जाता हृदय गलकर . क्योंकि तट विश्वास के रह खूब...
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शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

आँगन में 'चाँदनी '.

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क्या हुआ कि टहनियों के झुरमुट रोक लेते है राह वर्जनाएं लगाए खड़ी हैं दीवारें और मुँडेरें ‘ डराते हैं अँधेरे  पर रुकता नहीं कभी ...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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