Yeh Mera Jahaan

शुक्रवार, 19 जून 2020

मैं भी तो ....

›
घरेलू हिंसा पर आमंत्रित एक लघुकथा  --------------------------------------------------- “ देखो सुमी, वह दूसरे की बच्ची है उसकी जिम्मेद...
16 टिप्‍पणियां:
रविवार, 14 जून 2020

छत और आँगन

›
आँगन जिसके बिना घर अधूरा लगता है 9 मुझे बचपन से ही घर में आँगन और छत से बड़ा लगाव रहा है .  आँगन तो कवियों की रचनाओं में भी गूँजता ...
14 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 9 जून 2020

कविता रूठ गई है

›
( तीन चार साल बाद लिखा एक गीत) चलते चलते चट्टानों पर  चट्टानों सा निर्मम मन कैसे लिख पाता फूलों को, विस्मृत हुआ सुरभि का वन. बिखर...
15 टिप्‍पणियां:
रविवार, 7 जून 2020

'ऑनलाइन -काल'

›
( व्यंग्य ) देश-दुनिया इन दिनों 'लॉकडाउन' की दशा से गुजर रही है .और हम ऑनलाइन की ‘ महादशा ’ से . इसे समझने से पहले यह समझना जरू...
7 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 3 जून 2020

धरती का तप ---'नौतपा'

›
----------- -------------------------- कल यानी दो जून को अखबार में पढ़ा कि आज 'नौतपा' की अवधि समाप्त हो रही है .हम बचपन से ही न...
6 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 30 मई 2020

लॉक-डाउन

›
कैसी ये मजबूरियाँ , कैसा यह अवरोध ! घर में कारावास का ही होता है बोध .  'लॉक-डाउन' में 'लॉक' हैं , गली ,सड़क ,बाजार...
7 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 28 मई 2020

सजा

›
यह कहानी उस समय लिखी गई थी जब दिल्ली से पहली बात सैकड़ों मजदूरों ने अपने घरों की ओर पैदल ही पलायन किया था . उसमें एक लड़का अकेला ही अपने ...
10 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.