Yeh Mera Jahaan

शनिवार, 27 जून 2020

बचपन के शिलालेख

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(सन्  2001  में लिखा गया एक संस्मरण) समय की लहरों से मानस तट पर लिखे नाम धीरे धीरे मिट ही जाते हैं . फिर मेरा नाम कौनसा कोई संग्रहणीय शिल...
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शुक्रवार, 19 जून 2020

मैं भी तो ....

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घरेलू हिंसा पर आमंत्रित एक लघुकथा  --------------------------------------------------- “ देखो सुमी, वह दूसरे की बच्ची है उसकी जिम्मेद...
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रविवार, 14 जून 2020

छत और आँगन

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आँगन जिसके बिना घर अधूरा लगता है 9 मुझे बचपन से ही घर में आँगन और छत से बड़ा लगाव रहा है .  आँगन तो कवियों की रचनाओं में भी गूँजता ...
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मंगलवार, 9 जून 2020

कविता रूठ गई है

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( तीन चार साल बाद लिखा एक गीत) चलते चलते चट्टानों पर  चट्टानों सा निर्मम मन कैसे लिख पाता फूलों को, विस्मृत हुआ सुरभि का वन. बिखर...
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रविवार, 7 जून 2020

'ऑनलाइन -काल'

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( व्यंग्य ) देश-दुनिया इन दिनों 'लॉकडाउन' की दशा से गुजर रही है .और हम ऑनलाइन की ‘ महादशा ’ से . इसे समझने से पहले यह समझना जरू...
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बुधवार, 3 जून 2020

धरती का तप ---'नौतपा'

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----------- -------------------------- कल यानी दो जून को अखबार में पढ़ा कि आज 'नौतपा' की अवधि समाप्त हो रही है .हम बचपन से ही न...
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शनिवार, 30 मई 2020

लॉक-डाउन

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कैसी ये मजबूरियाँ , कैसा यह अवरोध ! घर में कारावास का ही होता है बोध .  'लॉक-डाउन' में 'लॉक' हैं , गली ,सड़क ,बाजार...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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