Yeh Mera Jahaan

सोमवार, 22 मार्च 2021

नदी का द्वीप

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(1984 में लिखी गई एक कविता ) अजस्र , स्रोतस्विनी के बीच एक निर्जन द्वीप  सिरजा गया  , माँ के द्वारा ही . उद्दाम  उन्मत्त प्रवाह में ...
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सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

खुशबू के गीत

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मौसम के द्वार पर ऋतुरानी आई पलकों के छोर खोल कलियाँ मुस्काईं . कोयल ने बाँची जो केसरिया पाती गूँज उठी सुधियों के आँगन शहनाई .     ...
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शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

एक पेन की तलाश

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यह हास्य-व्यंगात्मक संस्मरण लगभग 25 वर्ष पहले लिखा . लिखकर भूल भी गई . आज नजर पड़ी तो पोस्ट करने का विचार आया . पात्र और स्थान का नाम परिवर्...
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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

बन्द

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बलबीर बहुत खुश था .आज पलभर में ही टेम्पो ठसाठस भर गया . और दिनों उसे इन्तजार करना पड़ता था . कई बार तो एक दो सवारियों को लेकर ही बाड़े तक चक...
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रविवार, 23 अगस्त 2020

कितने चौराहे

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  हर सुबह करती हूँ एक प्रण फेंककर आवरण आलस्य का ,  करनी ही है पूरी आज कोई कहानी नई या पुरानी .. या कुछ नहीं तो लिख ही डालूँ एक स...
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शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

एक गीत पुरानी डायरी से

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  आज ही पढा--अगर किसी पर भरोसा करो तो पूरी तरह , बिना सन्देह के करो ।क्योंकि तब दो में से एक मिलना तो तय है---या तो जिन्दगी का सबक या एक अच्...
10 टिप्‍पणियां:
रविवार, 26 जुलाई 2020

कानू

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उस दिन सुबह सुबह चिड़ियों गिलहरियों की चीख पुकार के साथ ही गुलाब की क्यारी में एक नन्हा सा जीव आ गिरा था . वह गिलहरी का बच्चा था ,...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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