Yeh Mera Jahaan

रविवार, 27 मई 2012

जेठ हुआ मेहमान

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---------------------- सूरज की दादागिरी,सहमे नदिया ताल। ,हफ्ता, दे देकर हुई हरियाली कंगाल। तीखे तेवर धूप के हवा दिखाए ताव। मौसम के आत...
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सोमवार, 21 मई 2012

सोचो तो जरा....

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--------------- अभी मैंने सोचा नही तुम्हारे लिये जैसे सोचता है कोई अखबार में पढते हुए राजनीति की सुर्खियाँ कुढते हुए , पढ कर   भ्रष...
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शुक्रवार, 18 मई 2012

तब आप थे कहाँ ?

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19 मई 2012--- काकाजी ( पिताजी) की तृतीय पुण्यतिथि है । मुझे यह बात अक्सर गहराई से महसूस होती है कि आज भी एक सात-आठ साल की लडकी मुझमें जी र...
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मंगलवार, 15 मई 2012

और कुछ भी नही

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मातृ-दिवस पर पूर्व-प्रकाशित एक पुरानी लघुकथा ------------------------------------------------------- इन दिनों बैंगलोर में हूँ । मान्या व...
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गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

बोलो रामसहारे जी

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भैया ,रामसहारे जी । क्यों हो हारे--हारे जी क्यों तन्हा बेचारे जी । सोचो रामसहारे जी अलग अलग ही रहते हो उल्टे ही तुम बहते हो जो जो सब...
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मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

रमपतिया की तलाश में एक कविता

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रमपतिया ! तुम हँसती थी दिल खोल कर एक बड़ी बुलन्द हँसी । छोटी-छोटी बातों पर ही जैसे कि ,तुम्हारा मरद पहन लेता था उल्टी बनियान ...
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रविवार, 15 अप्रैल 2012

यह पगडण्डियों का जमाना है

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"यार तुम्हारा पाठ्यक्रम अक्टूबर-नवम्बर तक कैसे पूरा हो जाता है "? "पढाने से और कैसे ! मैं कोई पीरियड मिस नही करता । मे...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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