Tuesday, October 27, 2015

चाँदनी मुस्कान है .

धूप नभ का गर्व है अभिमान है
चाँदनी स्नेहमय मुस्कान है ।

दीप्त अविचल गगन का विश्वास है.
नयन में सौन्दर्य की यह प्यास है .
रात के कोमल हृदय का गान है
चाँदनी स्नेहमय मुस्कान है ।

चन्द कवि ने लिख दिये कितने
रुपहले छन्द ये ।
मौन कोई पढ रहा है
प्रीति के अनुबन्ध ये .
रूपधन सी मानिनी का मान है
चाँदनी स्नेहमय मुस्कान है ।

गाँव की अल्हड किशोरी
खेत, नदिया ताल .
लो ,गई है भूल अपना
रेशमी रूमाल ।
महकते ये अनछुए अरमान है

चाँदनी स्नेहमय मुस्कान है ।
(1999 में रचित)