Tuesday, September 27, 2016

जोड़ते हम रहे ...

राह में बिखरे काँटे हटाते रहे .
उम्रभर खाइयाँ ही पटाते रहे .

जीत लेंगे भरोसा किसी भी तरह ,
यूँ ही ताउम्र खुद को मिटाते रहे .

था ये मालूम ,तूफां उजाड़ेगा घर ,
फिर भी जीने का सामां जुटाते रहे .

आज देंगे वही कल मिलेगा हमें ,
बस यही मान सब कुछ लुटाते रहे .

वक्त आया , गया कब ? खबर ना हुई ,
राह में हम तो नजरें बिछाते रहे .

उनको लहरों का अन्दाज़ होगा नही ,
रेत पर नाम जो भी लिखाते रहे .

एक उत्तर भी आता तो कैसे भला ,
जोड़ते हम रहे , वो घटाते रहे .

चाँद सा जगमगाने की चाहत रही

पर अँधेरों से ही मात खाते रहे .

10 comments:

  1. दीदी! आपकी रचनाएँ हमेशा प्रेरणा देती हैं, प्रोत्साहित करती हैं... यहाँ तक की समाज की कुरीतियों और व्यवस्था की अनियमितताओं का भी जब-जब आपने उल्लेख किया है, तो उसमें हमेशा एक चांदी की लकीर दिखाई दी है... लेकिन आज इस गीत में एक निराशा का भाव, हार जाने का दर्द या घुटने टेक देने का दृश्य क्यों दिख रहा है... जानता हूँ कि यह भी नवरसों में से एक रस है... लेकिन आपकी रचनाओं का फ्लेवर ऐसा नहीं दिखा कभी...
    अंधेरों से मात खाना, जोडने के प्रत्युत्तर में घटाया जाना, रेत पर लिखा नाम मिट जाने वाला...
    आप सदा मेरी प्रेरणा रही हैं. फिर भी यह रचना बहुत ही प्यारी है. मैं खुद को इससे जुड़ा हुआ पा रहा हूँ... शायद इसलिए भी यह मुझे आईना दिखाती कम, मुँह चिढाती ज़्यादा प्रतीत हो रही है.

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    1. कभी कभी जब गाँठ ढीली हो जाती है तो गठरी में से यूँ ही कुछ गिर जाता है . हालाँकि यह रचना काफी पहले लिखी थी . कुछ नया न लिख पाने की कमी को दूर करने यहाँ डालदी . क्योंकि यह किसी संग्रह में नही है . क्योंकि निराशा व हताशा तो शाश्वत भाव है इसलिये इसे सामयिक भी माना जा सकता है .

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  2. कभी-कभी मन ऐसा ही हो जाता है- करने का सारा उत्साह बैठ जाये जब ,तब भी ,करते रहें हैं हम यही तो जीवन है .

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  3. साहित्य समाज का दर्पण होता है..कवि का तो काम ही है समाज को आईना दिखाना..इसमें यह कविता शत प्रतिशत खरी उतरती है..भले-भले बने रहकर ही कोई आनंद को पा ले ऐसा नहीं होता है..कुछ और भी करना होता है..यहाँ उसी की ओर इशारा है..ऐसा मुझे लगता है

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    1. आपने सच कहा अनीता जी . हम बाहर से प्रभावित होते ही हैं .

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    2. आपने सच कहा अनीता जी . हम बाहर से प्रभावित होते ही हैं .

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  4. हर शेर समाज को कुछ नया देने की बात करता हुआ है ...सच के करीब ... बहुत उम्दा ...

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  5. प्रेरणा देती बहुत उम्दा कमाल की प्रस्तुति

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