रविवार, 13 सितंबर 2026

अपनी खड़ी बोली

 मिसरी की गोली

अपनी  खडी बोली ।

माँ ने दूध में है घोली

अपनी खडी बोली ।

 

सरस है ,सक्षम है

सरल और शुद्ध है

अनुभूतियों का सागर

अभिव्यक्ति में प्रबुद्ध है

संस्कृति के द्वार पर

जैसे रंगोली .

मिसरी की गोली

अपनी खडी बोली ।

 

झरना ज्यों झरता है

पवन जैसे बहता है

धरती में नमी पाकर

बीज जैसे उगता है

आता वसन्त भरे

फूलों की झोली .

मिसरी की गोली

अपनी खडी बोली ।

 

शिशु की है किलकारी .

अलकें ज्यों गभुआरी .

अन्तर की बातों सी

हिन्दी मनोहारी .

इससे ही सजती है

सपनों की डोली .

मिसरी की गोली

अपनी खड़ी बोली .

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! खड़ी बोली यानि हमारी प्रिय हिंदी भाषा के बारे में बहुत सरस रचना लिखी है आपने, अपनी मातृ भाषा से किसे लगाव नहीं होता, लेकिन आजकल गंगा भी उलटी बह रही है, नन्हे बच्चों को पहले अंग्रेज़ी पढ़ाई जाती है

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