Friday, March 13, 2020

उन्हें सोचो देखो

क्या कभी सोचा है तुमने कि
 गन्दी नाली साफ करते हुए
वह कीचड़ में लिथड़ा आदमी
क्या सोचता होगा ,
जब कोई गुजर जाता होगा
एकदम साफ दमकता महकता
चमचमाती कार में या बाइक पर
सर्राटे भरता हुआ उसके बगल से
उसे एकदम नज़रअन्दाज़ करके .
सोचो और सोचकर देखो
मैं सोचती हूँ और पाती हूँ खुद को विनत 
कीचड में लिथड़े 
आदमी के सामने जो
निष्काम भाव से 
करता रहता है अपना काम .





5 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 14 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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