अँधियारे का त्रास बहुत है ।
उजियारे की आस बहुत है ।
ज्योतिर्मयी शारदे माँ ,
बस रिक्त हृदय भरदे
मन जगमग जग करदे ।
उस पर भय दूना दूना है ।
दृढ़ आशा विश्वास रहे ,
पथ यों गुंजित करदे
अन्तर निर्भय करदे ।
बस जगमग जग करदे ।
जंजालों में मन अटके ना ।
चौराहों पर अब भटके ना ।
गीत नेह के गाती जाऊँ ,
माँ ऐसे स्वर दे ।
मन जगमग जग करदे ।
कूल-किनारे हरियाली हो ।
अन्तर कोश नहीं खाली हो ।
नदिया का अविरल प्रवाह ,
निर्मल , कल कल स्वर दे
मन जगमग जग करदे ।

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