शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

माँ ऐसे स्वर दे


 अँधियारे का त्रास बहुत है ।

उजियारे की आस बहुत है ।

ज्योतिर्मयी शारदे माँ ,

बस रिक्त हृदय भरदे

मन जगमग जग करदे ।

 

दुर्गम पथ सूना सूना है ।

उस पर भय दूना दूना है ।

दृढ़ आशा विश्वास रहे ,

पथ यों गुंजित करदे

अन्तर निर्भय करदे ।                

बस जगमग जग करदे ।

 

जंजालों में मन अटके ना ।

चौराहों पर अब भटके ना ।

गीत नेह के गाती जाऊँ ,

माँ ऐसे स्वर दे ।

मन जगमग जग करदे ।

 

कूल-किनारे हरियाली हो ।

अन्तर कोश नहीं खाली हो ।

नदिया का अविरल प्रवाह ,

निर्मल , कल कल स्वर दे

मन जगमग जग करदे ।

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