1990 की डायरी से
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प्यार दो विश्वास दो
प्रभु ज्ञान की वह प्यास दो
पा जिसे ढूँढ़ू सरोवर ।
सरित सागर शिखर अम्बर ।
ज़िन्दगी को आस दो ।
मैं अकेली कठिन पथ है
विजन नीरव कटु अकथ है
उजड़ता परिदृश्य है पर
दृष्टि में मधुमास दो
प्रभु मुझे आकाश दो ।
दूर हों सन्देह डर सन्त्रास भी
द्वेष पीड़न विकल उद्धत साँस भी
हो न चिन्ता , युद्ध कोई
शान्तिमय आवास दो ।
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